मिया और मुहम्मद(mea or muhamd)part2

जिन दिनों संवाददाता' मूर्ति पूजा छोड़कर आर्यसमाज मे प्रविष्ट हुआतो पेशावर के योग्य पंडित स्वर्गीय मुरलीधर
प्रायः शिक्षक के रूप में कहा करते थे कि 'यद्यपि शुद्धं लोकविरुद्ध नाचरणीयं नाचरणीयम्' अर्धात् यद्यपि शुद्ध और सत्य
परंतु चूंकि संसार की राति के विरुद्ध है, इस कारण उस पर आचरण नहीं करना चाहिए और न उसे मानना चाहिए।
धारणतया विद्वान् पंडितों का तो यही सिद्धान्त है।
पण्डित बिहारीलाल, एक्स्ट्रा असिस्टेंट कमिश्नर अमृतसर स्वामी जी से भेंट के लिए पधारे और भेट के समय
तचीत में कहा कि महाराज ! आपके और विचार तो उत्तम है. सब प्रकार श्रेष्ठ परन्तु यदि आप मूर्ति का खंडन न करे
सब लोग आपके अनुकूल हो जावें और आपकी आज्ञा को स्वीकार करे । स्वामी जी ने उतर दिया मैं सत्य को नहीं

ड़ सकता।'

सरदार हरचरण दास रईस स्वामी जी से मिलने गये। वे इतने अधिक स्थलकाय थे कि चल फिर भी कठिनता से
कते थे। स्वामी जी ने उनको देखकर उनके सामने ही कहा कि यह हमारे देश के मृत संरक्षक हैं कि जिनमें चलने तक की
वित नहीं है ! ऐसे लोग देश का क्या भला कर सकते हैं?

स्वामी जी के सत्योपदेशों की जब बहुत चर्चा हुई तो एच० परकिस साहब कमिश्नर अमृतसर ने स्वामी जी से
चलने का विचार प्रकट किया । ला0 गुरमुख राय वकील ने स्वामी जी से कहा कि कमिश्नर साहब आप से मिलना चाहते
और वे आप से पूर्ण अनुराग-पूर्वक भेट करना चाहते है तो आप ही उनके बंगले पर चलें। स्वामी जी एक दिन गये और
"हा पर कई विशेष बातो के अतिरिक्त निम्नलिखित बातचीत हुई।

एच० परिकिस साहब कमिश्नर अमृतसर-‘हिन्दू धर्म सूत के धागों के समान कच्चाक्यों है ?"स्वामीजी-यह
है।
सत के धागे के समान कच्चा नहीं है अपितु लोहे से भी अधिक पक्का है । लोहा ट्ट जाये तो टूट जाये परन्तु यह कभी
रे में नहीं आता।

कमिश्नर महोदय-आप कोई उदाहरण दे तो हमको विश्वास आये ।'

स्वामी जी-'हिन्दू धर्म समुद्र के गण रखता है, जिस प्रकार समुद्र में असंख्य लहरे उठती है उसी प्रकार इस
मर्म में भी देखिये । (१) ऐसे लोगों का भी एक मत है जो छान-छान कर पानी पीते हैं ताकि पानी के द्वारा कोई अदृश्य कीट
के पट में न चला जाये। (२) एक मत ऐसे लोगों का भी है जो दुग्धाहारी हैं अर्थात् केवल दूध पीते हैं, अन्य कोई वस्तु
नहीं खाते-पीते । (३) साथ ही एक मत ऐसे लोगों का भी है जो वाममार्गी कहलाते हैं। वह जो कुछ पा जाते हैं उसको,
वित्र-पवित्र और योग्य-अयोग्य का विचार किये बिना, खा जाते है । (४) एक मत ऐसे लोगों का भी है जो जीवन भर
पति रहते हैं अर्थात न तो किसी र्ी से विवाह करते हैं और न किसी पर कुदृष्टि रखते हैं । (५) एक मत ऐसे लोगों का भी
नेबो पराई सियों से अपना मुंह काला करते हैं । (६) एक मत ऐसे लोगों का भी है जो केवल निराकार परमात्मा को ही
त हैं उसी का ध्यान करते हैं।G) फिर एक मत ऐसे लोगों का भी है जो अवतारों की पूजा करते हैं । (८) एक मत ऐसा

जो केवल ज्ञानी है। (९) एक मत ऐसा है जो केवल ध्यानी हैं । (१०) इसी धर्म में वह लोग भी हैं जो छुआ छत का
विचार करते हैं कि अन्य मत के लोग तो एक ओर शुद्रों के हाथ तक से न पानी पीते हैं, न खाना खाते है । (११) एक
लोगों का भी है जो शूद्रों के हाथ से पानी पीते हैं और इनसे भोजन बनवा कर खाते हैं। इतना होने पर भी वह सबके

कहलाते हैं और वास्तव में हैं भी हिन्दू ही ।कोई इनको हिन्दू धर्म से निकाल नहीं सकता। इसलिए समझना
कि यह धर्म अत्यन्त पक्का है. कच्चा नहीं ।'


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