परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part27

और विशुद्ध धर्म के विचार से सब दनका मप्तमद्गी और स्याद्वाद सहजता से समम्झ मैं आता हूं। फिर इतना सरपंच बढ़ाना किस काम का है। इसमें बाढ़ और ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part26

पट कहना अयोग्य अर्थात उसमें घटना वक्तृत्व है और पटपन अवक्तव्य है। मङ्ग यह है कि जो घट नहीं है वह कहने योग्य भी नहीं और जो है वह है और कर ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part25

है। पांचवां जो वास्तिकाय" जो चेतना लक्षण ज्ञान दर्शन में उपयुक्त अनन्त पर्यायों न परिणामी होनेवाला कर्ता भोक्ता है। और छठा "काल&...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part24

बैठा था उसको 'लीगने साजन मे* धोखे देखकर बोला, अरे साधु ! अशुद्व घोसता है “श्री गणेशाय नमः'' ऐसा धोखा । उसने भट लोटा भर गुरुजी ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part23

व तिलक कंठी धारण करते हैं, रामानन्दी बगल में गोपीचन्दन बीच में लाल, वक्त दोनों पतली रखा बीच में काला बिन्दु, माध्व काली रेखा और गौड बंगाली...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part22

कोई वैकुण्ठ में जाकर विष्णु के पग का चिह्न ललाट में करा आया है ? और श्री जर वा चेतन ? (वैष्णव) चेतन है । (विवेकी) तो यह रेखा जड़ होने से श...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part21

कोई मनुष्य वेद और वेदानुकूल आप्त ग्रंथों का अपमान करे उसको श्रेष्ठ लोग जातिवाह्य करदें, क्योंकि जो वेद की निन्दा करता है वही नास्तिक कहता ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part20

दशम समुल्लास: ISI(माऽपश्य विषयान् व्याख्यास्यामः । । । । । तर, मशीलता, सपा का संग और सद्विद्या के ।। ।। ।। 'द धार और इनसे विपरीत अन...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part19

पथ द्वि वि बदतः पेशो नाभिशते । सम्मान देना मेष सोन्या पुणं विदुः ।। १५ । (मनु० दrd) । इसेत्रस्थीत्पार्यान पच्च कन्पाय बन्यसे । विश्य् न्थि...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part18

होकर धर्म उपस्थित होता है, जो उसका शल्य अर्थात तीव्रता धर्म के कलतंक, कानकदू और अधर्म का छेदन नहीं करते अर्थात् धर्मी को मान अधर्मी को दएड...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part17

राजकीय निज काम अर्थात जिस को 'पोलिटिकल कहते हैं संक्षेप से कह दिया, अब जो विशेष देखना चाहे वह चारों वेद मनुस्मृति शुक्रनीति महाभारत आद...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part16

इसी प्रकार पाणिनि महर्षि ने सहस्र श्लोकों के बीच में अखिल शब्द अर्थ और ॥ की विद्या प्रतिपादित करदी है। धातुपाठ के पश्चात् उणादिगण के पढ़ान...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part15

सत्यार्थ प्रकाश: ६३ तः परो यस्मात्स तपरस्तादपि परस्तपरः" तकार जिससे परे और जो तकार से भी परे हो वह तपर कहता है, इससे क्या सिद्ध हुआ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part14

६२ तृतीयसमुल्लासः सदकारणवभित्पम् । वैशेषिक० १9। १ । १ । जो विद्यमान हो और जिस का कारण कोई भी न हो वह नित्य है, अर्थात् “सल ३ वध नित्य...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part13

गण करता है। जब हम इस माला को ग्रहण करते श्ै त हमारे हृदय म एष उल्लास उत्पन्न होता है, प्रति एक ज्योति जागरूक होती है। हमारा अन्तरात्मा यह...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part12

हमारे शरीर में नौ द्वार माने गए हैं। ज्ञान-कर्म-उपासना के द्वारा हम इन नो दारू को जानना चाहिए । इन नौ द्वारों के कार्यों को जानना तथा इन ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part11

प र सकेगा। यज्ञोपवीत के तीन तार मानव के ऊपर तीन ' के प्रतीक है—ऋषि-ऋण, मातृ-ऋण प्रौर देव-ऋण, जो इन ऋणों सं उच्चारण होने का संकल्प करत...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part10

प्रतीत होता है कि इनकी उत्पत्ति तथा विकास केवल आभासमात्र, १-जैसे औषधियों का मूल जल, २-जल का मूल अग्नि, ३-अग्नि का मल 'वायु तथा ४-वायु...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part9

है। इसके अपनाने के पश्चात् जगत् महत्व को प्राप्त होता रहता (सत्रहवां पुष्प २६-२-७२ ई.) २-पुरोहित पुरोहित उसे कहते हैं जो तेरे हित का ह...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part8

श्रीमान पूज्य ब्रह्मचारी कृष्णदत्त जी ने किसी जन्म में ऋषि प्र रूप में अनुसंधान करने पर जाना कि यजमान ही यज्ञ का अधिपति । जितना उसका हृद...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part7

२-ग्यारह प्रकार का साकल्य :-दस इन्द्रियों के साथ ग्यारह । समन्वय करके आहुति देना चाहती हूं। ४-दस प्रकार का साकल्य-दस इन्द्रियों से आहुति ...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part6

अध्वर्यु : वह श्रम करने वाला हो। एक सुन्दर प्रतिभा उसके समीप हो - संरक्षण में सुन्वर सामग्री तथा साधन होने चाहिएं जिससे वह अच्छी प्रक प्...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part5

जा दूषपतो से जागरूक रहे । पत: यज्ञ का रूपान्तर यह भी है कि यजमान को जागरूक रहना चाहिए । जागरूक रहने का अभिप्राय यह है कि वह नाना प्रकार क...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part4

रही। पर भ प [राज के पुत्र / गोष्ट ४ा गया ग्री7 21 पश्चात उस गर्भ, विर्ह सो गया वयव यह मृत्यु का प्राजा उग विरह में है। मेरी अन्तरात्मा शा...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha ), part3

का विधान भौतिक-यज्ञ वो महपियों द्वारा प्रतिपादित विधि-विधान में रखा चाहिए । तभी उससे प्रजा को लाभ हो सकता है । यश करने से पूर्व गुन्दर त...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha )part2

इसी प्रकार एक नदी ऐसी है जिसका सम्बन्ध प्राणी-मंडल से है। एक और नाड़ी ऐसी है जिसका सम्बन्ध ध्रुव-मण्डल से है । जब इस नाड़ी के द्वारा १-स...

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परमात्मा का ऊंचा(prmatma ka uncha )

नुन र दन करके इन तोक से स्यूल यन्नि क द्वारा जाता है। वह सुदमा रूप नरमता को प्राप्त होता है अठारहवां पुष्प १७-३-७२ ई०) यज्ञश ताला में ज...

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